Thursday, April 10, 2014

अबकी बार, भव्य श्री राम मंदिर निर्माण

   नरेन्द्र मोदी की हर तरफ धूम है | हर कोई उन्हें प्रधानमंत्री बनते देखना चाहता है | पर इसका मूल केवल उनका हिन्दुत्ववादी चेहरा है | यदि गुजरात दंगे ना हुए होते और नरेंद्र मोदी का कद रुख ना देखने को मिलता या वो टोपी पेहें लेते या माफ़ी मांग लेते तों ये जो दिन रात अंतरजाल पर प्रचार कर रहे है वो संभवतः प्रचार ना करते | अटल बिहारी की सरकार के बाद हिंदुत्व के एक भी मुद्दे को पूरा ना करने का प्रयास भी ना करने के कारण विश्व हिंदू परिषद से लेकर हर कोई क्रोधित था | दूसरा कारण सेवाक्षेत्रो का निजीकरण था, निजीकरण का आप विपक्ष मे रहते तों विरोध करते थे पर सत्ता मे आने पर इन्होने भी कांग्रेस का ही काम आगे बढ़ाया | निश्चित तौर पर कांग्रेस से कही उत्तम सरकार चली पर धोखेबाजी भावनाओं से खेलना लोगो को बर्दास्त नहीं था | यदि अटल बिहारी वाजपेयी स्वस्थ होते और २००४ के बाद चूनाव प्रचार करते तों कोई आश्चर्य नहीं के किसी हिंदूवादी के गुस्से का शिकार हों जाते जैसे आये दिन केजरीवाल होते रहते है | बात अभी भी वही है, नरेंद्र मोदी की सरकार चाहे बहुतमत से आये या अल्पमत से इस बार उन्हें सदन मे प्रस्ताव लाने होंगे वरना आर्य तों अपना काम करवाने के अन्य माध्यम निकाल ही लेंगे इस बार की धोखेबाजी क्षमा नहीं होगी |
श्री राम मंदिर के नाम पर कितने लोगो ने बलिदान दिया | क्षमा तों मुलायम सिंह को भी नहीं किया जायेगा पर हमारी पहली प्राथमिकता श्री राम मंदिर का निर्माण होगा | इसका कारण क्या है के भाजपा का चूनाव का समय आया और श्री राम मंदिर पर बात होने लगी | मै भाजपा से जुड़ा नहीं उल्टा, जन संघ के सह संथापक बलराज मधोक के साथ जो अटल बिहारी ने किया या १९६७ मे दीनदयाल उपाध्याय की हत्या के विषय मे भी प्रश्न हमारे यथावत है | सिर्फ इसलिए लिख रहा हू क्यों के भाजपा जानती है के उसके हिंदू मत ही उसे जीत दिलाएंगे और इसलिए उसने श्री राम मंदिर का मुद्दा रखा | राजनाथ सिंह माफ़ी मांगते फिर रहे थे थोड़े समय पहले तक तों आजम खा ने सही जवाब दिया यदि दुःख है तों बाबरी मस्जिद बनवा दे माफ़ी ना मांगे | राजनाथ सिंह को तों हिन्दुवादी जवाब दे देंगे | पर भाजपा मे इस बार भय है के नहीं के यदि उसने कोई प्रयास नहीं किया अपने मुद्दों को पूरा करने का तों ? कुछ प्रमुख मुद्दों पर चर्चा करते है |
१.       अयोध्या मे श्री राम मंदिर का निर्माण (भाजपा के २०१४ के घोषणा पत्र के हिंदी संस्करण के पृष्ठ ६३ पर)
२.       धारा ३७० को हटाना (भाजपा के २०१४ के घोषणा पत्र के हिंदी संस्करण के पृष्ठ १५ पर)
३.       सामान नागरिक सहिंता (भाजपा के २०१४ के घोषणा पत्र के हिंदी संस्करण के पृष्ठ ६३ पर)
४.       गौ रक्षा विधेयक (भाजपा के २०१४ के घोषणा पत्र के हिंदी संस्करण के पृष्ठ ६३ पर)
क्या कोई बाबरी मस्जिद थी ?
हम प्रमुखता से श्री राम मंदिर पर चर्चा करते है | जब मुस्लमान आक्रमण कारियों की गुंडागर्दी अपने चर्म पर थी अयोध्या का श्री राम मंदिर उन्होंने कब्ज़ा लिया | कोई इतना मुर्ख नहीं के पहले मंदिर तोड़े फिर उसके मलवे से मस्जिद बनाये | इतनी बुद्धि मुसलमान और मीर बाकी भी रखता है के मंदिर को हरा पुतवा दो और बन गई मस्जिद | क्यों के मस्जिदों मे गर्भ गृह नहीं होते | मस्जिदों मे तों गुम्बज भी नहीं होते क्या काबा मे गुम्बज या गुम्बद जो कहे है ? ये गुम्बदे उन्ही मस्जिदों मे मिलेगी जो कभी मन्दिर थे | प्रमाण के लिए अभी की बनी मस्जिदे देखे सब मे मीनारे है गुम्बद कही नहीं होती | गुम्बद हम आर्यो की ध्यान पद्धति का ध्यान कराती है | बहुत समय तक संघ वाले ये कहते रहे के वो मस्जिद थी मंदिर तोड़ के बनी ये कहना बंद करे | वो मंदिर था और उसपर सिर्फ कब्ज़ा किया था अधिक से अधिक अरबी मे लिखा पत्थर जडवा दिया जाता है और यही होता है उनका निर्माण |
दूसरा बाबरनामा का प्रमाण मिलता है के बाबरी एक लड़का था जिसपर बाबर मोहित था, सब जानते है बाबर समलैगिक था | अतः उस भवन का नाम बाबरी मस्जिद कर दिया | मुस्लमान दे ऐसी जगह का नाम समलैगिको के नाम बाबरी मस्जिद पर मंदिर का नही दे सकते | तों वो श्री राम मंदिर था और उसका पर पुनर्निमाण होना है |
मुसलमानों को क्या समस्या है ?
मुसलमानों को परवाह नहीं कौन सी इमारत तोड़ी जाती है | बात सिर्फ ये है के श्री राम के नाम पर आर्यो का जो शौर्य जाग उठा उसको देख कर ये घबराए है | यदि ये शौरी बना रहा तों पुरे देश मे लगभग ९८ प्रतिशत इतिहासिक मस्जिदों पर आर्य पुनः अपना अधिकार प्राप्त कर लेंगे | पर वे इतना नहीं सोच पा रहे के अयोध्या मे श्री राम मंदिर ना बनने देने से या मस्जिद का पेच फसा कर पुरे देश मे अपने लिए घृणा फैला रहे है | आर्यो के शौर्य की कल्पना भी नहीं कर सकते | क्यों के इतिहासकार वो दिखाते नहीं | अयोध्या मे ही थे देवी दीन पाण्डेय कहते है एक दिन मे ७५० मुस्लमान काट दिए थे अकेले ही | यानी ताना जी से कही ज्यादा लोग़ अकेले खत्म किये | हाल मे उनके गाव मे उनकी तलवार मिली उसे छपर मे वैसे ही वापस रख दिया गया | तों आर्य जन्म से शौर्यवान है बेकार की बातों के लिए वैर ना ले | श्री राम मंदिर के निर्माण मे स्वयं ईट लगाये आकर | यदि वे ऐसा करते है तों हम उनके लिए अयोध्या से बाहर भव्य मस्जिद बनवा देंगे पर हमें पता है ९ मन तेल नहीं होगा | मुसलमान साधारण सी बात साधारणतः समझते ही नही |
क्यों आवश्यक है श्री राम मंदिर
इसका सबसे प्रमुख कारण है १९९० मे बलिदान हुए कारसेवक | घर से निकाल कर किशोर लडको को पुलिस ने गोली मार दी | जिस लड़के ने श्री राम मंदिर के निर्वासित ढाचे पर भगवा झंडा फिराया था उसे भी मार दिया गया | ये सत्ता की ताकत पुलिस वो भी थी जो सुबह से शाम तक ढाचा गिरता रहा और देखती रही | श्री राम का नाम हमारे जीवन से पहले और मृत्यु के बाद तक जुड़ा है जुड़ा रहेगा | तों उनके नाम पर शुरू किया गया काम पूरा करना होगा | कोई मतलब नहीं उन बलिदानों का अगर आप विकास का नाम लेकर मूल आस्था को छोड़ देते है | अटल-आडवानी ने सत्ता का सुख लिया जाने कितने भाजपा वालो ने लिया और फिर भूल गए | आडवानी को जनता ने २ बार तमाचा दिया २००४ मे २००९ मे जिस व्यक्ति मे वैचारिक स्थायित्व नहीं उस दोमुहे का कोई अस्तित्व नहीं |
दूसरा और सबसे प्रमुख कारण है के श्री राम एक ऐसा नाम है जो लाखो सालो से हमारे पूर्वज लेते आरहे है | ऐसा त्यागी तपस्वी चक्रवर्ती राजा जिसने सूर्यवंश के चक्रवर्तित्व को राज व्यव्यस्था को नए आयाम पर पहुचाया | राजनीति जैसे पवित्र शब्द को अपने शौरी और नीतियों से और अधिक पवित्र कर दिया | श्री राम ने अकेले १४००० की सेना जो खर नाम के राक्षस के नेतृत्व मे थी खत्म कर दिया ये ऐसा हुआ के कोई धनुष लेकर जाए और नक्सली इलाको से पूरा नक्सली साफ़ कर दे | तों श्री राम को मानने वाले शौर्य की परंपरा का पालन तों करेंगे ही | विवाह के बाद लगभग २५ वर्ष का ब्रह्मचर्य ५१ वर्ष से ८१ वर्ष तक सत्ता सम्हालना और फिर सन्यास को वेद जिस मार्ग की बात कर्ता उसपर श्री राम चले सो उनके पीछे-२ जनता चली | वे आज भी हमारे राजा है आगे भी रहेंगे | श्री राम के मार्ग पर चलकर जिस शौर्य का पालन करते है उस से हम पुनः चक्रवर्ती राज्य की स्थापना कर सकते है | इसलिए इस बार भव्य श्री राम मंदिर निर्माण |
विदेशी नहीं चाहते हम श्री राम का नाम ले
अंग्रेजो ने पहले भी प्रयास किये | रामायण मे प्रक्छेप कराये गए | श्री राम पर ही सीता माता के त्याग का आरोप लगवा दिया, उन्हें माँसाहारी बता दिया | अरे इतने युद्ध का अर्थ ही क्या जब त्याग ही करना था | पर आर्यो ने एंग्लो लोगो की धूर्तता का पर्दाफाश किया | उत्तर कांड के प्रक्छेप सिद्ध किये |
हाल के वर्षों मे साईं बाबा नाम का एक ढोंगी खड़ा कर दिया गया | फिल्म बनी फिर धारावाहिक बना | उसके मंदिर बनने लग गए | विदेशियो ने भारतीयों के मन मस्तिष्क पर अच्छी शोध कर रखी है | एक माँसाहारी अल्लाह मालिक कहने वाला हाथ किस सफाई को धर्म से चमत्कार से जोड़ने वाले को उठाने का अर्थ था के आप जो श्री राम नाम का जाप कर रहे है उस से दुर रहे | ऐसे नारे दिए गए ओम् साईं राम यानी श्री राम और परमात्मा के श्रेष्ठ नाम ओम् के बीच मे एक माँसाहारी ढोंगी का नाम डाल कर पुजवाया जाने लगा | राम यर्थार्थ पवित्र आचरण सादा जीवन मर्यादाओ का पालन करने वाले उदाहरण थे | जब श्री राम का इतना नाम लेंगे तों कभी ना कभी पढेंगे ही उनके बारे मे | तब बस यही कहेंगे वाह श्री राम प्रभु ऐसा राजा हमे पुनः-२ देवो | पर यदि आप चमत्कार मे विश्वास करेंगे तों आप पुरुषार्थ से दुर् हों जायेंगे | इसलिए साईं बाबा एक प्रत्यक्ष उदाहरण है | प्रमाण देखना है तों आसपास देखे श्री राम जानकी मंदिर कितने है और उनमे कितने लोग़ जा रहे जब के साईं बाबा के मंदिरों मे कितने लोग़ जा रहे |
आर्यो के लिए इतना ही पार्याप्त है के उनके राजा प्रभु श्री राम का भव्य मंदिर अयोध्या मे बने | फिर तों आर्यावर्त मे राम राज्य और विश्व का वैदिकीकरण का कार्य प्रारंभ हों जाएगा | इसलिए जो ताकत प्रेम और समर्थन नरेंद्र मोदी जी को जनता दे रही वो श्री राम से जुडी आस्था के कारण |
भाजपा ने संविधान मे रह कर बात कही है | श्री राम मंदिर आस्था का विषय है और ये अदालत से बाहर है ये बात भाजपा वाले काफी समय से कह रहे | हम कहते है आस्था का विषय है पर इतने बड़े विषय पर कोर्ट साक्ष्यों पर राय देने का साहस करेगा ? जो सुप्रीम कोर्ट की बेंच आपातकाल पर अपनी राय न दे पाई, ताज महल पर बी बी सी कह सकता मंदिर है पर सुप्रेमे कोर्ट ने याचिका रद्द कर दी जिसकी भाषा अंग्रेजो है वो करेगी | हमें मंदिर निर्माण से मतलब है जहा कोई मस्जिद ना हों आसपास ५ किलोमीटर के क्षेत्र मे | हम आपको समर्थन दे रहे है आप हमे मंदिर दीजिए |
धारा ३७० हटने पर पाकिस्तान युद्ध की मूर्खता कर सकता है |
गौ रक्षा पर केन्द्र मे विधेयक आना चहिए ये चौथा प्रयास होगा और अटल बिहारी के किये कार्यों का पश्चाताप होगा |
समान नागरिक सहिता बन कर मुस्लिम बहने शरियत से बाहर आयेगी और देश मे पंथ निरपेक्षता का अच्छा उदाहरण तय होगा |
भाजपा यदि कर सके तों अल्पसंख्यक कितने प्रतिशत तक माना जाएगा ये तय करे और २००६ मे बनाया अल्पसंख्यक मंत्रालय खत्म कर के अंग्रेजो की अल्पसंख्यक बहुसंख्यक निति से देश को बाहर करे | खरी भाजपा ने खुद ही इतने वादे कर रखे है हमारे सुझाव तों बहुत दुर् का है | आशा है इस बार भाजपा ने ऐसा वादा नहीं किया जिसे वो पूरा ना कर सके | यदि किसी मुद्दे पर प्रस्ताव लाते उनकी मिलीजुली सरकार गिर जाती है तों अगली बार जनता उनके साहस के लिए पूर्णबहुमत देगी | श्री राम मंदिर का निर्माण प्रारंभ होगा भारत को ना केवल इस्लामीकरण के चंगुल से बाहर करने का अपितु आर्यो की साम्राज्यवादी निति के विस्तार का पुनः प्रारंभ होगा | अयोध्या मे श्री राम मंदिर हमारी इतिहासिक धरोहर, शौर्य, समृधि, सम्पन्नता, उच्च चारित्रिक आदर्श, त्याग तपस्या, वैदिक जीवन पद्धति का प्रतिक होगा अतः
अबकी बार, भव्य श्री राम मंदिर निर्माण


ध्यान दे : महर्षि दयानंद ने सत्यार्थ प्रकाश मे श्री राम और श्री कृष्ण ही हर जगह प्रयोग किया है | अतः (श्री) राम मंदिर भी बोल रहे है तों श्री राम मंदिर बोले | जय श्री राम

Sunday, February 9, 2014

Anti Hindu is presented as Hindu Icon, Ironical

आंग्ला लेख मै पुनः प्रकाशित कर रहा हू | सर्वप्रथम ये तथ्य अग्निवीर से ही प्रचारित हुए थे | कुछ समय बाद वे मुकर गए और लेख हटाने लग गए | धर्म से अर्थ प्रधान होते लोगो को कितना समय लगता है | हम यहाँ ये इसलिए रख रहे है क्यों के जो दिया वो सब विवेकानंद के साहित्य से दिया हुआ है और उसकी पुष्टि अंतरजाल पर कही भी हों सकती है एक प्रमुख वेबसाईट का लिंक भी साथ मे है | अतः उनका श्रेय केवल सब ढूंड कर संकलित करने का है सो हम साभार मानते है | प्रमाण स्वरुप आप इन बंधू का ब्लॉग देख सकते है
http://agrasen.blogspot.in/2009/03/hinduism-and-its-critiques.html
और सीधे श्रोत पर भी देखे यहाँ से ये हटा नहीं पाए संभवतः
https://groups.yahoo.com/neo/groups/aryasamajonline/conversations/topics/12150
यद्दपि अब अग्निवीर व्यवसायिक हों गए तों सुर बदल गए देखे प्रमाण
https://www.facebook.com/agniveeragni/posts/634826413198369
हिमांशु पाठक नाम के व्यक्ति के उत्तर स्वरुप शुरुआती टिप्पणी देखे |
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Is it not a blunder or fraud to have Vivekananda as role model for Hindutva? As per authentic sources (few reproduced below), he represented:
a. Beef eating as hallmark of glorious Vedic culture
b. Meat and beef as necessity for revival of our nation
c. Ram, Sita, Krishna etc being drunkards and meat-eaters
d. A chain smoker, who despite claiming to be sanyasi indulged shamelessly in this addiction, even in front of ladies
e. Prophet and Jesus being great teachers of world, God incarnate and messengers of equality and peace, among rare role-models of world.
f. Islam being necessary for survival of Vedanta!
g. Money being more important than concern for humanity.

If despite these blatant holes in his ideology, he is still the greatest role model for RSS, VHP and adorns all their speeches, writings, calendars, photos, symbols etc, why not have same kind of followership for a Nehru, Jinnah, etc. And if he is justified as role model, does not all the hoopla over cow-protection, islam, ram krishna being ideals become hoax?

Please refer to following sources to check veracity:
VIVEKANANDA A BIOGRAPHY by Swami Nikhilananda (Published 1953)
THE COMPLETE WORKS OF SWAMI VIVEKANANDA

Now some selected excerpts:

1. http://www.ramakrishnavivekananda.info/vivekananda_biography/05_wandering_monk.htm
"Orthodox brahmins regarded with abhorrence the habit of eating animal food. The Swami courageously told them about the eating of beef by the brahmins in Vedic times. One day, asked about what he considered the most glorious period of Indian history, the Swami mentioned the Vedic period, when 'five brahmins used to polish off one cow.' He advocated animal food for the Hindus if they were to cope at all with the rest of the world in the present reign of power and find a place among the other great nations, whether within or outside the British Empire."

2. http://www.ramakrishnavivekananda.info/vivekananda/volume_5/writings_prose_and_poems/the_east_and_the_west.htm#iii
Instances are found in the Râmâyana* and the Mahâbhârata* of the drinking of wine and the taking of meat by Rama and Krishna, whom they worship as God. Sita Devi vows meat, rice, and a thousand jars of wine to the river-goddess, Gangâ!* 

"Embracing Sitâ with both his arms, Kâkutstha (Râma) made her drink pure Maireya wine, even as Indra makes Shachi partake of nectar.Servants quickly served flesh-meat variously dressed, and fruits of various kinds for the use of Rama."

- "(I saw) both of them (Krishna and Arjuna) drunk with Madhvâsava (sweet spirituous liquor made from honey), both adorned with sandal paste, garlanded, and wearing costly garments and beautiful ornaments."(Udyoga, LVIII. 5).
- "Be merciful to us, O goddess, and I shall, on my return home, worship thee with a thousand jars of arrack (spirituous liquor) and rice well-dressed with flesh-meat" (Ramayana).
3. Next para:

Whatever one or the other may say, the real fact, however, is that the nations who take the animal food are always, as a rule, notably brave, heroic and thoughtful. The nations who take animal food also assert that in those days when the smoke from Yajnas used to rise in the Indian sky and the Hindus used to take the meat of animals sacrificed, then only great religious geniuses and intellectual giants were born among them; but since the drifting of the Hindus into the Bâbâji's vegetarianism, not one great, original man arose midst them.
4. http://www.ramakrishnavivekananda.info/vivekananda/volume_3/lectures_from_colombo_to_almora/reply_to_the_address_of_welcome_at_madura.htm
"There was a time in this very India when, without eating beef, no Brahmin could remain a Brahmin; you read in the Vedas how, when a Sannyasin, a king, or a great man came into a house, the best bullock was killed; "
5. http://www.ramakrishnavivekananda.info/vivekananda/volume_3/lectures_from_colombo_to_almora/reply_to_the_address_of_welcome_at_madura.htm
About vegetarian diet I have to say this — first, my Master was a vegetarian; but if he was given meat offered to the Goddess, he used to hold it up to his head. The taking of life is undoubtedly sinful; but so long as vegetable food is not made suitable to the human system through progress in chemistry, there is no other alternative but meat-eating. So long as man shall have to live a Râjasika (active) life under circumstances like the present, there is no other way except through meat-eating. It is true that the Emperor Asoka saved the lives of millions of animals by the threat of the sword; but is not the slavery of a thousand years more dreadful than that? Taking the life of a few goats as against the inability to protect the honour of one's own wife and daughter, and to save the morsels for one's children from robbing hands — which of these is more sinful? Rather let those belonging to the upper ten, who do not earn their livelihood by manual labour, not take meat; but the forcing of vegetarianism upon those who have to earn their bread by labouring day and night is one of the causes of the loss of our national freedom. 

He implies that vegetarian food made us slave!!
6. http://www.ramakrishnavivekananda.info/vivekananda/volume_3/buddhistic_india.htm

You will be astonished if I tell you that, according to the old ceremonials, he is not a good Hindu who does not eat beef. On certain occasions he must sacrifice a bull and eat it. 

7. http://www.ramakrishnavivekananda.info/vivekananda/volume_9/newspaper_reports/part_iii_indian_newspaper_reports/01_madura_mail_jan_28_1893.htm
The perfect religion is the Vedic religion. The Vedas have two parts, mandatory and optional. The mandatory injunctions are eternally binding on us. They constitute the Hindu religion. The optional ones are not so. These have been changing and been changed by the Rishis to suit the times. The Brahmins at one time ate beef and married Sudras. [A] calf was killed to please a guest.
8. http://www.ramakrishnavivekananda.info/vivekananda/volume_8/epistles_fourth_series/060_blessed_and_beloved.htm
BLESSED AND BELOVED (Mr. E. T. Sturdy), 
So far the journey has been very beautiful. The purser has been very kind to me and gave me a cabin to myself. The only difficulty is the food — meat, meat, meat. Today they have promised to give me some vegetables. 

9. http://www.ramakrishnavivekananda.info/vivekananda/volume_9/letters_fifth_series/106_mrs_bull.htm
The result of this steady work in the West and the tremendous work of a month in India upon the Bengalee constitution is "diabetes". It is a hereditary foe and is destined to carry me off, at best, in a few years' time. Eating only meat and drinking no water seems to be the only way to prolong life — and, above all, perfect rest for the brain. 

10. Vivekananda in Public: Hindus Should not Kill any Animal for Food
"What business has a man to kill a cow, a goat, or any other animal for food?" Volume 3, "Buddhistic India" Feb. 2 1900
Vivekananda in Private: Hindus Should Eat Meat - Half a Pound a Day
Per-Person Recommended
"Q. Is it feasible for us Bengalis, poor as we are, to take meat?
Swamiji: Why not? You can afford to have it in small quantities. Half a pound a day is quite enough."

Volume 5, Conversations and Dialogues, IX

11. Vivekananda's Sense of Noble Service to Humanity
"I am quite satisfied with my task in life. I have been much more
active than a Sannyasin ought to be. Now I will disappear from society
altogether. The touch of this world is degenerating me, I am sure, so
it is time to be off. Work has no more value beyond purifying the
heart. My heart is pure enough; why shall I bother my head about doing
good to others?" Volume 9, Letter LXXXV Feb. 6th 1896

Vivekananda: In It For 'Quick Money'
"I had a lecture here [Los Angeles] last night. The hall was not
crowded, as there was very little advertisement, but a good-sized
audience though. I hope they were pleased. If I feel better, I am
going to have classes in this city soon. I am on the business path
this time, you know. Want a few dollars quick, if I can."

Volume 9, Letter CLIX Dec. 9th 1899
"I am making money fast - twenty-five dollars a day now. Soon I will
work more and get fifty dollars a day. In San Francisco I hope to do
better still - where I go in two or three weeks. Good again - better,
I say - as I am going to keep the money all to myself and not squander
it anymore. And then I will buy a little place in the Himalayas... And
the whole world may go to ruin round my ears, I would not care."
Volume 9, Letter CLXI Dec. 27th 1899

हिंदू शब्द पर फैली कुछ भ्रान्तियो का समाधान

ये शोध पूर्ण लेख विद्वान विश्वप्रिय वेदानुरागी जी का है | हम जन हित मे उसे पुनः प्रकाशित कर रहे है |
सब को सादर नमस्ते !
यह लेख निम्न लिंक का उत्तर है |
https://www.facebook.com/photo.php?fbid=719275088091522&set=a.675662945786070.1073741827.675655572453474&type=1&theater
यदि आपको (हिंदुवादियों) को हमारा इस प्रकार का लेख पसंद नहीं तो कृपा कर “हिन्दू” जैसे अशास्त्रीय, असंस्कृत, अपभ्रंश, विकारी, अशुद्ध शब्द को सही सिद्ध करने का असफल प्रयास बार-बार ना करें | यदि आप इसे सिद्ध करने के लिए प्रयास करेंगे, मंडन करेंगे, तो हम फिर पुन:-पुन: सत्य का उद्घाटन करेंगे और खंडन कर सत्य का मंडन करेंगे, करते रहेंगे |
हिन्दू शब्द को लेकर आर्य बंधुओं को कोई शंका नहीं है |
पं• चक्रपाणि त्रिपाठी जी के द्वारा संग्रहित लेख में हिन्दू शब्द को सिद्ध करने की जगह हिंदी को तोड़-मरोड़ कर सिद्ध किया | क्या पं.चक्रपाणि त्रिपाठी जी ! ८ वीं शताब्दी से पूर्व की किसी संस्कृत पुस्तक में से हिन्दू शब्द दिखा सकते हैं ?
हिंदी की उत्पत्ति भी बहुत विचित्र-विकृत ढंग से प्रस्तुत की जो की अनेक प्रश्न खड़े करती है |
यदि हिंदी शब्द का विकार इहनदी बना तो व्याकरण के किस नियम से बना ? यदि ऐसे नियम अन्य शब्दों पर भी घटाये जाएँ तो क्या उचित होगा ?
पं.चक्रपाणि त्रिपाठी जी के अनुरूप हमने भी अन्य शब्दों की तोड़-फोड़ की है :-
• अनादी शब्द का क्या अर्थ है ? अनादी शब्द बना है अ+नादी | यहाँ “अ” निषेध अर्थ में है और नादी का अर्थ है नदी का बड़ा रूप | जब नदी, छोटी हो तो उसे नदी कहेंगे और जब वह बड़ी नदी हो तो उसे नादी कहेंगे | और नादी के आगे यदि निषेध अर्थ में “अ” लग जाएगा तो बन जायेगा अनादी, जिसका अर्थ होगा छोटी नदी | इस प्रकार अनादी शब्द का अर्थ होगा छोटी नदी |
• कुलक्षणी का अर्थ होगा कुल् + लक्षण = कुल के लक्षण |
• आलोचना = आलू+चना
क्या शब्दों के अर्थ इसी प्रकार खोजे / घड़े जायेंगे ?
सृष्टि-उत्पत्ति क्रम भी अशास्त्रीय बताया गया है, दर्शनों में जो उत्पत्ति क्रम बताया गया है वह ही मान्य-उचित है |
पं.चक्रपाणि त्रिपाठी जी हिन्दुकुश को याद करते हैं और कहते हैं की “हिन्दूकुश शब्द ....का अर्थ है हिन्दू का वह स्थान जहाँ कुश ही कुश हैं” इस प्रकार के अर्थ गलत हैं | उत्तर :- जिस पर्वत को आप हिन्दू-कुश के नाम से जानते हैं उसे संस्कृत साहित्य में पारियात्र पर्वत के नाम से बतलाया गया है | इतिहास उसे पारियात्र पर्वत कहता था और बाद में यह हिन्दू-कुश के नाम से प्रसिद्ध हो गया | हिन्दू-कुश के आये कुश शब्द का अर्थ होता है क़त्ल करना | कुश शब्द फ़ारसी भाषा का है | इस कुश शब्द का सम्बन्ध संस्कृत के कुश के साथ नहीं है | इस प्रकार जिस स्थान पर हिन्दुओं (मूर्तिपूजकों) का कत्लेआम हुआ हो वह स्थान हिन्दू-कुश कहलायेगा, - जैसे खुद-कुशी | क्या यह हिन्दू-कुश शब्द/नाम/स्थान हमारे लिए गर्व का विषय / स्थान है ? क्या हम चाहेंगे कि हिन्दुओं (मूर्तिपूजकों) का कत्लेआम किया जाता रहे या किया जाये ? हिन्दू-कुश पर्वत नाम भी हिन्दू शब्द/नाम जितना ही प्राचीन है और यह विदेशी शब्द है ना की संस्कृत का |
पं.चक्रपाणि त्रिपाठी जी ने इण्डिया शब्द की भी उत्पत्ति बताई जो की गलत है|
पं.चक्रपाणि त्रिपाठी जी जिन ग्रंथों को आठवीं शती से पूर्व का बता रहें हैं वे सारे के सारे नवीन हैं |
मेरुतंत्र :- मेरु तंत्र का प्रसिद्ध श्लोक हैं |
श्लोक है :- हिन्दू धर्म प्रलोप्तारौ जायन्ते चक्रवर्तिन: |
हीनश्च दुषयप्येव स हिन्दूरित्युच्यते प्रिये ||
इसका अर्थ निम्न प्रकार बताया जाता है:- “आगामी समय में राजा लोग हिन्दू धर्म का नाश करने वाले होंगे और हे प्रिये पार्वती ! हिन्दू लोग हिंसा को दूषित करते हैं, इसलिए इनका नाम ‘हिन्दू’ है |
पाठकों के ज्ञानार्थ बता दूँ कि उपरोक्त ग्रन्थ इस देश में मुसलामानों के आने के बाद बना है | इसको बने हुए ३००-४०० वर्ष ही हुए हैं अतः हिन्दू शब्द/नाम की प्राचीनता सिद्ध करने के लिए ये प्रमाण उपयुक्त नहीं है |
मेरुतंत्र एक अत्यंत परवर्ती तन्त्रग्रंथ है | उपरोक्त श्लोक मेरुतंत्र के ३३ वें प्रकरण में निम्न प्रकार आता है :-
पञ्चखाना सप्तमीरा नव साहा महाबला: |
हिन्दू धर्म प्रलोप्तारौ जायन्ते चक्रवर्तिन: ||
हीनश्च दुषयप्येव स हिन्दूरित्युच्यते प्रिये |
पूर्वाम्नाये नवशतां षडशीति: प्रकीर्तिता: ||
उपर्युक्त सन्दर्भ में हिन्दू शब्द की जो व्युत्पत्ति दी गयी है वह है ‘हीनं दूषयति स हिन्दू’ अर्थात् ‘जो हिंसा को दूषित करता है’ पर इस वाक्यांश में या श्लोक में कहीं भी हिंसा पद ही नहीं है |
‘हीनं दूषयति स हिन्दू’ का एक और अर्थ किया जाता है कि जो हीन(हीन या नीच) को दूषित समझता (उसका त्याग करता है) वह हिन्दू है | जो अधम या हीन को जाति बहिष्कृत करे वह हिन्दू |
‘हीनं दूषयति’ में हीनम् पद है, जिसका अर्थ है दुर्बल, कमजोर, अधम, नीच और दुष् का अर्थ होगा निन्दा करना या नष्ट करना, अर्थात् कमजोर को सताने वाले को ‘हिन्दू’ कहते हैं | क्या हिन्दू शब्द के समर्थकों को यह स्वीकार्य होगा ? आर्यजन तो हीनों का उद्धार और उपकार ही करते हैं | क्या कोई व्यक्ति अपने आपको ‘कमजोर का सताने वाला’ कहलवा सकता है ?
ऊपर कि व्युत्पत्ति में से जो भी सच हो, इसमें संदेह नहीं कि यह यौगिक व्युत्पत्ति अर्वाचीन है, क्यों कि इसका प्रयोग विदेशी आक्रमणकारियों के सन्दर्भ में किया गया है |
मेरुतंत्र में आये खान और मीर शब्द ही दर्शा रहे हैं की यह ग्रन्थ मुस्लिम आक्रमण के बाद की रचना है ना की प्राचीन | कुछ हिन्दुवादी, मेरुतंत्र में आये खान और मीर शब्द का यह कह कर बचाव करते हैं की हमारे ऋषि-मुनि भविष्य को देख लेते थे और उस घटना का वर्णन अपने ग्रंथों में पहले से ही कर दिया करते थे | लेकिन यदि ऐसा ही है तो फिर ऋषियों के ग्रन्थ में आये मुस्लिम प्रसंगों को हम हेय दृष्टि से क्यों देखें ??? असलियत यह है की ये ऋषियों द्वारा अपने ग्रंथों में उल्लेख नहीं किया है |
पाठकों की सामान्य जानकारी के लिए बता दूँ कि मेरुतंत्र ही वह संस्कृत का पुराना(अपेक्षाकृत) ग्रन्थ है जिसमें हिन्दू शब्द आता है और यही ग्रन्थ है जो हिन्दू-वादियों को अपने बचाव में प्रिय लगता है लेकिन मेरुतंत्र में कुछ अत्यंत आधुनिक शब्दों के व्यवहार से जान पड़ता है कि तंत्रका निर्माण आधुनिक है |
भविष्य पुराण :- आधुनिक ग्रन्थ है जिसमें सन्डे, मंडे आदि का उल्लेख है | इसी के साथ कृपा कर पढ़ें –भविष्य पुराणम् प्रतिसर्गपर्व चतुर्थ खण्ड २८वाँ अध्याय जिसमें लिखा है “न वदेद्यावनीं भाषां प्राणै: कण्ठगतैरपि | ||५३|| अर्थात् “प्राण के कंठ तक चले आने पर भी यावनी (मुसलमानी) भाषा के उच्चारण नहीं करना चाहिए | पर कितने दुःख कि बात है कि पं.चक्रपाणी जी इस शब्द की सिद्धि के लिए श्रम कर रहे हैं |

मेदनी कोष :- यह मेदिनी कोश भी आधुनिक कोश-रचना है अतः प्रामाणिक नहीं है, प्राचीन संस्कृत साहित्य में इसका प्रयोग नहीं मिलता | मेदिनिकर कृत इस मेदिनी कोष का काल १२०० ई. – १२७५ ई. के बीच माना जाता है |
हेमन्त कोषी कोष :- आधिनिक कोष है | निरुक्त या ५वीं शताब्दी के अमरसिंह विरचित “अमरकोश” में तो हिन्दू शब्द नहीं मिलता | इन हेमन्त जैसे आधुनिक कोशों में हिन्दू शब्द/नाम का होना कोई आश्चर्य नहीं है पर इन कोशों से हिन्दू शब्द / नाम की प्राचीनता सिद्ध नहीं होती बल्कि अर्वाचीनता ही सिद्ध हो रही है |
राम कोष :- आधुनिक कोष है
कालिका पुराण :- कालिका पुराण” १०वीं शताब्दी का जैन मत का ग्रन्थ है अतः यह अर्वाचीन ग्रन्थ हिन्दू शब्द की प्राचीनता सिद्ध करने में अक्षम है |
शब्द कल्पद्रुम :- आधुनिक ग्रन्थ है शब्दकल्पद्रुम कोशों में आर्य शब्द के अर्थ भी दिये गये हैं |

बृहस्पति आगम :- बृहस्पति आगम आधुनिक काल का ग्रन्थ है | बृहस्पति आगम ग्रन्थ, वह ग्रन्थ नहीं है जो कि बृहस्पति जी ने लिखा था | इतिहास में एक माननीय बृहस्पति जी हो गये हैं जो राजनीति शास्त्र के विद्वान थे | राजनीति के जिस महान् शास्त्र का उपदेश भगवान् ब्रह्मा ने दिया था, उसे विशालाक्ष शिव ने संक्षिप्त किया | उसी का अति संक्षेप बृहस्पति जी ने किया | यह शास्त्र, बार्हस्पत्य शास्त्र के नाम से प्रसिद्ध हुआ | इस शास्त्र के श्लोक यत्र-तत्र उद्घृत आज भी मिलते हैं |
ख्रीष्ट एरा प्रारंभ होने के आसपास हुए वराहमिहिर जी रचित “बृहत्संहिता” का उद्धरण यदि दिया होता तो कुछ-कुछ मान्य होता लेकिन बृहस्पति-आगम तो नवीन ग्रन्थ है |
कुछ लोग बृहस्पति आगम कि इस व्याख्या के आधार पर हिन्दू धर्म का पूर्ण स्वरुप बनाते है और कहते हैं कि हिन्दू का “हि” अर्थात् हिमालय और “न्दू” का इंदु | क्या ये पूर्ण स्वरुप हैं ? पूर्ण स्वरूप तो तब बनता जब हिन्दू के “हि” “न्” और “दु” का अर्थ बताया जाता | लेकिन पूर्ण स्वरुप बनाते ही प्रश्न होता है कि क्या हिन्दू शब्द किसी अन्य शब्द का संक्षिप्तिकरण हैं क्या ? यदि हाँ तो फिर उस तर्क का क्या होगा जिसमें तर्क देने वाले कहते हैं कि ये सिन्धु शब्द का विकारी है ? दोनों तर्कों में से एक को पसंद करना होगा, दोनों नहीं चलेंगे | लेकिन प्राचीन साहित्य में ना होना भी तो हिन्दू शब्द/नाम पर प्रश्न चिह्न लगाता है |
एक संक्षिप्तिकरण और देखिये :- “हि” “न्” “दु”
“हि” अर्थात् हित ना करे वह
“न्” अर्थात् न्याय ना करे वह
“दु” अर्थात् दुष्टता करे वह
और इसका प्रमाण निम्न श्लोक है :-
हिन्दू शब्द की एक और व्याख्या देखिये जिसमें हिन्दू शब्द का निन्दित अर्थ दिया गया है |
हितम् न्यायम् न कुर्याद्यो , दुष्टतामेव आचरेत्
स पापात्मा स दुष्टात्मा , हिन्दू इत्युच्यते बुधै:||३/२१||
आत्मानम् यो वदेत् हिन्दू, स याति अधमां गतिम् |
दृष्ट्वा स्पृष्ट्वा तु त हिन्दुं, सद्य: स्नानमुपाचरेत् ||७/४७||
हिंकारेण परीहार्य:, नकारेण निषेधयेत् |
दुत्कारेण विलोप्तव्य:, यस्स हिन्दू सदास्मरेत् ||९/१२||
इति कात्थक्य: शिवस्मृतौ शिव स्मृति
(जो हित और न्याय ना करे, दुष्टता का आचरण करे, वह पापी, वह दुष्टात्मा हिन्दू कहलाते हैं)
(जो व्यक्ति अपने आप को हिन्दू कहता है वह अधम गति को प्राप्त होता है और ऐसे हिन्दू को देख कर स्पर्श कर शीघ्र ही स्नान करें)
(हिं हिं करके जिसका परिहार करना चाहिए, न न करके जिसका निषेध करना चाहिए, दूत् दूत् करके जिसे दूर भगाना (नष्ट कर देना) चाहिए वही हिन्दू है इसे सदा याद रखें)
अद्भुत कोष :-हिन्दू शब्द कि व्युत्पत्ति अन्य शब्दकोशों में तो मिली नहीं पर आधुनिक कोश ‘अद्भुत कोश’ में मिल गयी |अद्भुत!! भट्टोजिदीक्षित जी ने भी ‘हिन्दू’ शब्द की सिद्धि नहीं की है और ना कहीं उल्लेख किया है |
पारिजात हरण :- कीर्तनिया शैली का सर्व प्रथम नाटक पारिजात हरण नाटक अलाउद्दीन खिलजी के समकालीन मिथिलानिवासी उमापति उपाध्याय का बनाया हुआ है (१३२५ ई. के लगभग)| और कमाल की बात ये है कि ये श्लोक उस नाटक में है ही नहीं अतः इसका प्रमाण देना व्यर्थ है | उमापति मिश्र का यह नाटक संस्कृत और हिन्दी मिश्रित शैली का सर्व प्रथम प्रमाण है | इस नाटक में वार्तालाप की भाषा संस्कृत है किन्तु समस्त गीत हिन्दी में लिखे गये हैं |उमापति का जन्म दरभंगा जिले के भौर परगना के कोइलख नामक ग्राम में हुआ था और उन्होंने हरिहर देव के राजदरबार का संरक्षण प्राप्त किया | हरिहर देव का समय १३०५ से १३२४ ई.तक माना जाता है इससे सिद्ध होता है कि उमापति सन् १३२४ से पूर्व अवश्य विद्यमान थे |साहित्य में एक और पारिजात हरण नाटक का उल्लेख मिलता है जो कि शंकर देव जी का बनाया है और ये असम में १५ वीं सदी के आसपास हुए थे, यदि उपरोक्त श्लोक को इस नाटक का मान भी लें तो हिन्दू शब्द की प्राचीनता सिद्ध नहीं होती |
शांग्धर पद्दति :- आश्चर्य कि बात तो ये कि कालिका पुराण और शारंगधर पद्धति दोनों ग्रन्थ के शब्दों में लगभग समानता है, और एक शब्द ‘यवन’ का प्रयोग है | यहाँ ‘यवन’ शब्द किस सन्दर्भ में प्रयुक्त है यह विचारणीय है | शारंगधर पद्धति में तो वेदमार्ग भी शब्द है तो क्यों ना हम अपने धर्म को वेदमार्गी कहें ? उल्लेखनीय है की “शारंगधर पद्धति” १३६३ ई. की रचना है | दूसरी बात यह है की शारंगधर पद्धति में आर्यावर्त पद है और अर्वाचीन राजाओं का नाम निर्देश भी है |
माधव दिग्विजय :- आधुनिक ग्रन्थ है
वृद्ध स्मृति :- वृद्धस्मृति सच में वृद्ध है या युवा उसका भी कोई पता नहीं है | दूसरी बात ये कि वेदों के पश्चात राजनैतिक धर्म शस्त्र के पण्डित मनु हुए हैं | जिनकी स्मृति विद्यमान है | यद्यपि स्मृतियाँ संख्या में १८ हैं परन्तु सब में मनु की प्रशंसा है | इसी को श्रेष्ठ माना गया है |
इस प्रकार श्री चक्रपाणि त्रिपाठी जी ने एक भी प्रमाण प्राचीन ग्रन्थ का नहीं दिया इसलिए हिन्दू शब्द शास्त्रीय सिद्ध नहीं होता, संस्कृत शब्द सिद्ध नहीं होता |
वयं राष्ट्रे जागृयाम

Sunday, December 15, 2013

केजरीवाल से नास्तिक भारत के निर्माण की योजना

केजरीवाल को रमन मेग्सेसे पुरस्कार मिला है | ये पुरस्कार रोक्फेलर बंधुओ द्वारा प्रायोजित है | रोक्फेलर पूरी दुनिया में तेल पर नियंत्रण रखते है | भारत की तेल कंपनियों में भी अप्रत्यक्ष इनकी पकड है | मेग्सेसे पुरस्कार दिया गया है अब तक उस व्यवस्था को सुदृण करने वालो को जो आंग्ला लोगो (अंग्रेजो) ने बनाई थी | पहला मेग्सेसे पुस्कार सी दि देशमुख को मिला था रेसिर्व बैंक का पहला भारतीय गवर्नर और आई सी एस अधिकारी | परिवार नियोजन में कम बच्चे की योजना को बानू जहागीर कोयाजी, शुद्ध हुए मुसलमानों को वापस मुस्लमान करवाने वाले जे पी और विनोबा भावे को | संदीप पाण्डेय जैसे प्राध्यापकों को जो खुले आम भारतीय ख़ुफ़िया एजेंसी रा की पाकिस्तान मे किये कार्यों की निंदा करते है | यानि विश्व बैंक की योजनाओ को जो सुदृण कर्ता है उसपर विशेष मेहेरबानी होती है इस पुरस्कार की |
केजरीवाल को प्रकाश में लाने का अर्थ ये है के भविष्य जब नरेंद्र मोदी की सरकार आयेगी तब स्वाभाविक है मुस्लिम वर्ग के जिहादी तत्व लड़ाई दंगे करे | पकिस्तान से युद्ध हों जाए चीन से भी हों सकता है तो ऐसे में लड़ने के बाद लोग उब जाएँगे के अब धर्म नहीं चाहिए | धर्म से तो दुःख मिलता है राम मंदिर की जगह अस्पताल बनवा दो कुछ काम आये राम मंदिर तो किसी काम का नहीं | ऐसे विचारों को पोषित करवाने के लिए राजनितिक विकल्प हुआ अरविन्द केजरीवाल के माध्यम से | खेल वही है अनार्यों के बनियों का | २०२४ के बाद या तो मुसलमानों के ताकत की कुछ समय के लिए सरकार बने या सीधे परिवर्तित शैली से कम्युनिस्ट लोगो की सरकार बने | यानी नास्तिको की, ईश्वर मानो ना मानो, विवाह करो ना करो, समलैगिक हों ना हों कोई फर्क नहीं पड़ता बस जीवन शैली अच्छी जियो भले कर्ज पर जियो |
 एक ऐसा वर्ग जिसे कोई खास फर्क नहीं पड़ता के देश में क्या होता है या लोग कैसे जीते है उन्हें सुविधा चाहिए बिजली, पानी की जहा हिंदू मुस्लिम का मुद्दा भी न आये | आम आदमी पार्टी कांग्रेस का एक अच्छा विकल्प है जब तक के लोग खुद ना जान ले के समस्या बर्तानिया लोकतंत्र प्रणाली है जो हम पर थोपी गई है | लोकतंत्र के विरोध में बोलने का साहस कितने लोग कर पाएंगे | लोकतंत्र स्थापना के लिए तो जापान पर २-२ परमाणु बम गिरा दिये गए | आंग्ला (अंग्रेजी) से प्यार करने वाले वर्ग को भी विकल्प मिल गया “आप” के तौर पर |

अरविन्द केजरीवाल का अधिकतर कम पढ़े लिखे लोगो को उम्मेदवार घोषित करना संभवतः अपने दल में भविष्य में कोई प्रतिद्वंदी ना खड़ा होंने की सोच है | दल का एक मात्र योग्य ईमानदार चेहरा जो शासन करने लायक है ऐसा सिद्ध करने का प्रयोजन मात्र है | खाड़ी देशो से आये धन से उत्तर प्रदेश के मुस्लिम परस्त नेता खड़े हुए अब दिल्ली के अंदर ऐसे ही नेताओ को ताकत दिलाने का काम किया गया है | लोग बस १ चीज समझे के लोग तब तक सुखी नहीं हों पाएंगे जब तक वो अंग्रेजो के बनाये तंत्र से पीछा नहीं छुडाएंगे | ऐसी कोई योजना जो हमारे अन्न दाता यानी किसानो के हित की, अर्थ व्यवस्था के धुरी गौ माता के रक्षण संरक्षण की बात ना करे वो कभी देश में महंगाई कम नहीं कर सकती | पुरानी व्यवस्था को लाने के लिए हमें वेद की बात करनी होगी | स्वराज्य तब आयेगा जब हमें अपने गौरवशाली इतिहास को पुनः दोहराने की चाह होगी | उस व्यवस्था में सब सुखी थे बिना बैंको के, बिना नौकरियों के, बिना बड़ी-२ मशीनों के |
आइये वेदों के और लौटने का प्रयास करे | ऋषि मुनियों के भारत के निर्माण पर कार्य करे ना के ऐसे लोगो की जो समलैगिको को बीमार मानने के बजाये उन्हें बढ़ावा देने का कार्य करे | आइये हम आस्तिक और चरित्रवान भारत का निर्माण करे |

Sunday, September 15, 2013

कम्युनिस्म का नया रूप : आम आदमी पार्टी

कम्युनिस्म यानी साम्यवाद ये उपजा पूंजीवाद से, पूंजीवाद उपजा आद्योगिक क्रांति से, आद्योगिक क्रांति का बौधिक श्रोत दुर्भाग्य से यूरोपीय जातियों का लालच के साथ आर्यावर्त आगमन | हमारे यहाँ महर्षि मनु के आदेशानुसार महायंत्रो का निर्माण निषेध रहा और उनकी आज्ञा पालन होती रही पर जितनी भी तकनीक थी वो सब विद्या चली गई | जो स्वायत्त उद्धमी थे हमारे जैसे जुलाहे, लोहार,इस्पात उत्पादक,कुम्हार इत्यादि वो सब धीमे-२ केंद्रीकृत होता गया और लोग अपना काम छोड़ के नौकरी करने लगे | तो इस प्रकार पूंजी एक जगह एकाग्रित होने लगी बजाये सबमे योग्यता अनुसार वितरित होने के | यहाँ जन्म हुआ पूंजीवाद का जहा शक्ति और नियंत्रण कुछ एक के हाथ में रहता है | पूंजीवाद के थोड़े ही समय में उसके बनाये गड्ढे से साम्यवाद की विचारधारा का जन्म हुआ | जब आप नौकरी करेंगे उनकी जिन्होंने महर्षि मनु के प्रकृति के अनुसार चलने वाले आदेश का पालन नहीं किया वो महर्षि मनु के अपने भृत्यो (नौकरों) को पहले भोजन खिला के भोजन करो वो भला क्या पालन करेंगे | वो तो अपने नौकरों के मुख का निवाला भी छीन लेंगे | तो मजदुर संगठनों का जन्म होना स्वाभविक है वही हुआ | लेबर यूनियन, ट्रेड यूनियन बनवा-२ कर साम्यवाद की विचारधारा को पनपाया और स्थान-२ पर खुनी क्रांति लाइ गई | संपन्न धनाढ्य वर्ग का भीषण जनसंहार हुआ, धर्म को अफीम माना गया | पूंजीवाद और साम्यवाद दोनों ही नास्तिकता प्रचारित करते है | पर अब पूंजीवाद का चेहरा बदला है आज का कोर्पोरेट जगत कहा जाता ग्लोबलाइस्ड सिस्टम में यहाँ कम्युनिस्म की जगह कैसे बनाई जाए |
तो देखिये जिस प्रकार पूंजीवाद ने ही साम्यवाद की विचारधारा को जन्म दिया और पनपाया | आज स्वरुप बदल के ये कोर्पोरेट कल्चर में ट्रेड यूनियन संभव नहीं और समस्या नौकरों को भी नहीं | इस सिस्टम ने बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार को जन्म दिया | वास्तविकता ये है के पूंजीवादी व्यवस्था की शासन व्यवस्था कहलाती है लोकतंत्र | लोकतंत्र चलता है धनवानों के आधार पर | आप कुछ भी कर ले ये व्यवस्था बिना अमीरो के चुनाव खर्च कोई लोकतांत्रिक देश नहीं उठा सकता | तो लोकतंत्र और धनवानों की पूंजीवादी गठजोड़ जन्म देती है भ्रष्टाचार युक्त तंत्र को | जो दान में धन देगा चुनाव लड़ने को वो लाभ उठाएगा जीतने वाले अपने भिक्षु नेता से | जो नेता खर्च कर के आया है वो धन कमाएगा ही कमाएगा | आप कोई कानून बना ले इस व्यवस्था में आप भ्रस्टाचार से नही निकल पाएँगे | होगा क्या रूपए का अवमूल्यन, परिणामतः महगाई बढ़ेगी आम आदमी परेशान होगा | यहाँ इसके विकल्प की आवयश्कता पड़ेगी तो लीजिए विकल्प खड़ा है |

ये बात करेंगे जिसकी नगरीय जनता सुनना चाहती है | आज का मध्यम वर्ग ये कम्युनिस्ट मनिफेस्तो के Bourgeoisie and Proletariat विषय में Bourgeoisie पर पकड बनाना हुआ आम आदमी पार्टी का एक धेय | बिजली, पानी, पेट्रोल, भ्रष्टाचार ये भोली जनता फसी हुई रोज की दाल-रोटी में, इन्हें फसाया भी इसी लिए गया था के ये अपने मुद्दों से बाहर निकलेंगे तब तो राष्ट्रिय हित के मुद्दों को देखेंगे, धर्म-अधर्म देखेंगे, बड़ा सोच पाएंगे | किसे परवाह कश्मीर की अगर उनके क्षेत्र में परिस्थिति सालो बाद वहा आने वाली है | सो लीजिए प्रशांत भूषण जैसे लोग लिए गए एक एजेंडा पूरा करने के लिए | राष्ट्रवाद नहीं होना चाहिए सीमाए खत्म करने का कम्युनिस्ट विचार ही सोवियत संघ इतने समय तक खड़ा रहा | धर्म अफ़ीम है सो कुमार विश्वास जैसे लोग है इस एजेंडे की पुष्टि के लिए के लो हम आपके भगवानो का यु मजाक उड़ाते है | यहाँ सोनिया गाँधी की ही तरह केजरीवाल भी अब कम बोलना सीख गए है | ये सब बड़ा पूर्व नियोजित हुआ |

पहले बड़े-२ घोटाले फिर उनका रहस्योद्घाटन फिर जन आंदोलन फिर दिखाना के इस से कुछ नहीं होगा आपको सिस्टम में घुस के ठीक करना होगा अंदर से | और यही प्रकाश झा ने भी अपनी फिल्म सत्याग्रह में दिखाया जिसकी हम आगे चर्चा करेंगे | तो एक सरल सा सवाल उठता है के आप का क्या प्रत्याभूत (गारंटी) के आप नहीं भ्रष्ट होंगे | क्या आप जनता के १०-१० रूपये चंदे से चुनाव प्रचार कर पाएँगे | क्या आपको अपना हित साधने पूंजीपति या बाहरी धन से सहायता नहीं मिल रही ? फिर आप क्यों ना उनकी ही तरह बेईमानी करेंगे | जैसे २५ साल के कांग्रेस शासन से जनता उबी तो जनतापार्टी की सरकार बनी फिर पुनः कुछ वर्षों बाद बी.जे.पी, एन.डी.ए गठबंधन के साथ आई | पर कार्य उसने वही सब किये जो कांग्रेस कर रही थी जब के उसने वोट कुछ और कह के लिए थे | बबूल का पेड आम नही दे सकता कोई भी खाद डाल के देख ले | समस्या चुनाव व्यवस्था है जहा १ बलात्कारी दुराचारी के मतदान का मूल्य भी उतना ही है जितना किसी धर्मात्मा सज्जन का | ये ऐसे ठीक नहीं होगा, ये ब्रिटिश पार्लियामेंट्री सिस्टम है हमारी प्रजतंत्र व्यवस्था त्रयी संसदीय है जिसका संछिप्त वर्णन ऋषि दयानंद ने सत्यार्थ प्रकाश में दिया है |
तो अभी आम आदमी पार्टी का क्या खतरा उसके लिए इतना लिखने का कारण क्या है ये उतना महत्व का सामाजिक मुद्दा आपको नहीं दिखा होगा जितना के इस मंच पर होना चाहिए | हम अपनी चिंता स्पष्ट करते है जो हमें दिख रहा | नक्सली जो कम्युनिस्ट विचारों का हिंसक रूप हैं वे यदि २०१८-१९ तक विद्रोह करते है तो ऐसे में उन्हें दिल्ली जीतना होगा | बोल्शेविक क्रांति की तरह भारत में भी यदि दिल्ली पर नियंत्रण हों जाता तो पुरे देश पर हों जाएगा | तो यदि चीन बाहर से हमला करता है और नक्सली हमला करते है तो केवल दिल्ली अंदर से जितनी होगी | और यदि दिल्ली में किसी उनके अपने की सरकार हुई तब | राज्य सरकारआन्दोलन की अनुमति और सशस्त्र क्रांति के लिए पुलिस छूट आसानी से दिल्ली में प्रवेश अनुमति दे देगी | तो समझिए दूरगामी उद्देश्य के क्यों धर्म या राष्ट्र धर्म की बात नहीं करती आम आदमी पार्टी ? क्यों गौ रक्षा उनका विषय नहीं ? कश्मीर के विरोध में बयां देने वाले |
सत्याग्रह चलचित्र जो की प्रकाश झा द्वारा निर्देशित है वो देख कर जो बाते समझ आएंगी वो ये की आपको इण्डिया गेट का बासमती चावल खाना चाहिए, घर में अल्ट्रा टेक सीमेंट से घर बनवाना चाहिए, अखबार हिन्दुतान पढ़ना चाहिए, और टी वी चैनल ए बी पी न्यूस देखना चाहिए | यही नहीं जो एक ईमानदार पार्टी है वो आज के समय में आम आदमी पार्टी है खैर ये आपको फिल्म के अंत में पता चलेगा यदि आपकी स्मरण शक्ति प्रबल होगी | सत्याग्रह का और उसके निर्देशक का विषय क्यों उठाया यहाँ वो आपको लेख के अंतिम भाग तक स्पष्ट हों जाएगा | ज्ञात हों के प्रकाश झा रामविलास पासवान की जनता दल सेक्युलर की टिकट से २००४ और २००९ में चुनाव लड़ के हार चुके है |
सत्याग्रह बनाने वाले प्रकाश झा चक्रव्यूह जैसी फिल्म भी बना चुके है जिसमे नक्सली शोषित वर्ग दिखाया गया | आज २०० से ऊपर जिलो में नक्सली फ़ैल चुके है | दिल्ली और महानगरों में ये लोग अपने लड़के कोचिंग सेंटर्स के माध्यम से भेजते है | दिल्ली में तो हिन्दुवादी संगठनों में भी घुसने का प्रयास रहा इनका | तो ये लोग यु ही शांत नहीं बैठे या फ़ैल नही रहे | दिल्ली सुरक्षित है जैसे तैसे यदि भाजपा या कांग्रेस रहे पर वामपंथी विचारों का कोई आया तो खतरा बाहरी हों जाएगा | जिसके लिए जनता तैयार नहीं या सेना जब तक अपना निर्णय ले देर हों चुकी हों |
नक्सली कोई देश हित का कार्य नहीं कर रहे है | हमारे ही जवानों को मारने वाले, आर्थिक तौर पर भी देश में गरीबी बढा रहे है | नक्सली क्षेत्रो से अयस्क जापानी कंपनी निकाल रही | जब के अनेको छत्त्तीसगढ़ के अनेक जिलो के अनेक ग्रामो में कुटीर उद्योग की तरह पुनः स्टील उद्योग खड़ा किया जा सकता है | नक्सली संघठन चीन द्वारा पोषित हुए और अब तो वो चीन के भी कमाऊ पुत साबित हों गए है | हजारों करोड रूपए का बजट बनता है इन संघठनो का जिनपर सरकार ध्यान नहीं देती | यदि राजव्यवस्था चाहे तो १० दिन में सब साफ़ हों जाए | नक्सल विद्रोह कहा से शुरू हुआ और कहा पहुच गया |  नक्सलबाड़ी से शुरू हुआ विद्रोह के आन्दोलन का अग्रणी नेता कानू सान्याल वर्तमान नक्सल आन्दोलन की गति से छुब्द हों कर ७८ वर्ष की आयु में आत्म हत्या कर ली |
प्रकाश झा संभव है के आम आदमी पार्टी से अगला चुनाव हारने की तैयारी कर रहे हों | विशुद्ध भारतीय भाषा में कितने राजनितिक दलो के नाम आपने सुने होंगे ? हिंदू महासभा, आर्यवीर दल, राजार्य सभा(६० के दशक का दल जिसके संस्थापक इन्द्रदेव यति आज भी १०० वर्ष के लगभग है और जीवित है रामदेव इन्ही के मुद्दे उठा रहे है), हरयाणा का राज आर्य निर्मात्री सभा पर जितने भी भारतीय भाषा में या सांस्कृतिक नाम जुड़ा होता उनका कोई भविष्य नहीं बनाने दिया जाता | साधारण सा सूत्र समझिए के जहा पार्टी शब्द लगा हों, या आंग्ला का शब्द वहा विदेशी हस्ताक्षेप तो निश्चित ही है | कांग्रेस विशुद्ध विदेशी शब्द जो देश में संगठन के नाम पर शासन कर रहा | समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी, जनता दल सेक्युलर, जनता दल यूनाइटेड, कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इण्डिया, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इण्डिया और अब आम आदमी पार्टी | यदि ये दल और इसके नियोजक देश भक्त है और वास्तव में भ्रस्ताचार के विरुद्ध है तो इन्हें राष्ट्र हित के मुद्दे बोलने में झेप नहीं होनी चहिये | कश्मीर पर स्पष्ट रुख दे केजरीवाल, गौ रक्षा पर समर्थन करे, भाजपा की बुराई करते नहीं थकते तो जरा भाजपा की तुष्टिकरण की भी आलोचना करे | धार्मिक सौहार्द के लिए ये आवश्यक है के जो चीज जैसी है उसे वैसा ही कहा कहा जाए | विदेश निति पर अपनी राय स्पष्ट करे और अतए के वो कैसे चुनाव के महंगे खर्च से बचेंगे | वो अपने मिले दान का ब्यौरा सार्वजनिक करेंगे | फिल्मो को बहुत लंबे समय से भारतीय जनता के अवचेतन में बसे नैतिक सिधान्तो को मिटने के लिए किया जा रहा | अब फिल्मे उनके अवचेतन में अपने विचार बैठा रही | १ चलचित्र ऐसा नही कर पाता पर निरंतर उसी विषय पर सब एक जैसा बोले जो जनमानस की सोच बदलती है | भारत की जनता इस षण्यंत्र को जितनी जल्दी समझे उतना अच्छा | वर्तमान में लोगो के पास सिर्फ नरेन्द्र मोदी जी का विकल्प बचा है | पर ये पूर्ण समाधान नहीं, परिवर्तन के लिए अभी जनता में चाह नहीं जनता जानती ही नहीं के समस्या कहा है | समस्या हमारा लोकतंत्र है और इसे वैदिक प्रजतंत्र में जब तक नहीं किया जाएगा गोल-२ चक्कर लगाती रहेगी जनता |
ओम् शुभम् 

Sunday, September 8, 2013

क्या आप मुज्जफरनगर की घटना से आने वाला समय देख पाए?क्या आप तैयार है ?

सपा सरकार आई तो मायावती के प्रशासन का महत्व समझ आने लगा | धडाधड दंगे और एक वर्ग विशेष द्वारा छोटी-२ बातों को लेकर झगडा करना और उस झगडे को इतना बढ़ा देना के जिला स्तर पर कर्फ्यू से नीचे की तो कार्यवाही ना होना | ये बुलंद हौसले बता रहे है उस वर्ग के जो कह रहा है अब सरकार हमारी है | हम तुम्हारी बहु बेटियों के साथ जैसा चाहे वैसा खेलेंगे और विरोध करोगे तो मार देंगे | चिंतन और चर्चा करोगे तो मार देंगे | बैंक में अगर हमारा नम्बर नहीं आया तो हम गाली देकर उप्रद्र्व शुरू कर देंगे | हम पवित्र है शासक है और तुम दोयम दर्जे के नीच काफिर हों | ये सोच है उस वर्ग की जिहादी मानसिकता की जिसे अल्पसंख्यक कहा जाता है |
खैर पूरा उत्तर प्रदेश आने वाले समय में तबाही की कगार पर बैठा है | एक तो बांग्लादेशी घुसपैठियों द्वारा बहुत ही पूर्व नियोजित ढंग से बस्तिया बसाई गई है | ये वही मुगलिस्तान की बेल्ट है जो ब्रह्मदेश (बर्मा:म्य्यांमर) बंगलादेश असोम बंगाल बिहार से होते हुए उत्तर प्रदेश और फिर पकिस्तान को जोड़ती है | म्यांमार के अहिंसक बौधो को आई एस आई की ये सरल योजना समझ आगई | उन्होंने अपनी घर को साफ़ करना शुरू कर दिया पर हमारे यहा तो उनको बसाया जा रहा उनके दम पर सरकार चल रही है | और नमूने दिखाना शुरू कर दिया गया है | जिन्होंने उन २ भाइयो को मारते देखा उन्हें यही लगेगा के ये तालिबान या पाकिस्तान की कहानी होगी | पश्चिमी उत्तर प्रदेश में तालिबानीकरण की सिर्फ शुरुआत है | मीडिया आपको तब तक अँधेरे में रखेगी जब तक आग आपके घर तक न आजाये | आज सेना के लोग सब देखते और जानते हुए भी कुछ नही कर सकते पर कल को पाकिस्तान हमला कर दे और यही विद्रोह उसी समय कर दिया जाए तो पहला सवाल सेना सीमा सम्हालेगी के घर ? दूसरा प्रश्न जो जाट,गुज्जर,राजपूत,यादव इत्यादि अनेको-अनेक जातीया सेना में है उनके परिवारों की सुरक्षा का जिम्मा कौन लेगा क्यों के उनके लड़के तो हमारी रक्षा कर रहे है सीमाओ पर या कही अन्य स्थानों पर | वे अपने परिवार, बहु बेटियों और समाज की सुरक्षा के लिए ही तो सीमा पर है पर तब वे कैसे लड़ेंगे जब उनका अपना घर खतरे की ओर होगा ? वे सीमा सम्हाले या अपना घर ?
नहीं ये बहुत व्यहवारिक प्रश्न है | पकिस्तान से लेकर भारत के जिहादियों ने ये सोच के रखा है क्यों के ये अब पुलिस से नही डरते | ये या तो सेना से डरते है या संगठित हिन्दुओ से | पर सेना बिना अधिकारों के साथ भेजी जाती है और संगठित हिंदू होता नहीं जब तक के पानी उसके सर पर ना आजाए तो अब सवाल उठता है आप भी यही प्रतीक्षा कर रहे है ? पानी सर के ऊपर आने का ? आपने अपनी घर की स्त्रियों, अपनी संपत्तियो की सुरक्षा के लिए क्या किया है ? निम्न प्रश्नों के स्वंय को उत्तर दे-
१.       क्या आपके घर में लाइसंसी असलहा है ?
२.       क्या आपको वो चलाना आता है ?
३.       क्या आपका परिवार बड़ा है ?
४.       क्या आपकी आपके पड़ोसियों से बनती है ?
५.       क्या आपके क्षेत्र मोहल्ला या ग्राम में कोई रक्षा समिति बनाने पर कार्य हुआ है ?
६.       क्या आपका नजदीकी पुलिस थाने में कोई परिचित है ?
७.       क्या आपके घर में १ लाठी है ?
८.       क्या आपको वो चलाना आता है ?
९.       क्या आप ४ भाई है और वो साथ या आसपास रहते है ?
१०.    क्या आपके ४-५ संताने है या आपने भी महगाई के कारण १-२ बच्चे कर रखे है ?
११.    क्या आपके क्षेत्र में मुस्लिम आबादी ३० प्रतिशत से ऊपर है ?
अधिकतर सवालो के जवाब यदि ना में है तो यकीन मानिए आप घोर संकट में है | तो इनके समाधान सुनिए के लगभग २०१५ के बाद की स्तिथियो में खुद को कैसे बचाना है |
१.       अपने घर में लाइसेंसी हथियार अपनी आत्म सुरक्षा के लिए खरीद के रखे | चाहे मोटर साइकल बेच के ले या अपनी पत्नी के जेवर ये उन्ही की सुरक्षा के लिए है | आत्म रक्षा का अधिकार आपको संविधान देता है |
२.       जो ले उसे चलाना आना चाहिए | समय-२ पर अभ्यास करते रहे |
३.       कुछ नही रख सकते तो घर में एक लाठी ले ले और उसे चलाना सीखे |
४.       अपने बालक बालिकाओ को अ जुडो इत्यादि का प्रशिक्षण अवश्य से अवश्य दिलाए |
५.       क्षेत्र का कोई संगठन बना हों सुरक्षा के लिए तो उस से जुड़े |
६.       नहीं बना तो तुरंत ऐसे लघु मोहल्ला रक्षा समिति या ग्राम रक्षा समिति या मंदिर रक्षा समिति नाम के अंतर्गत संगठित हों जाए |
७.       अपने निकट पुलिस थानों के नम्बर रखे ताकी आपातकाल की स्तिथि में तुरंत सुचना दे सके |
८.       A.K 47, A.K56, या Hand Grenade का मुकबला भारत सरकार द्वारा मिलने वाले लाइसेंसी हथियारों से सामना नहीं किया जा सकता पर आपके द्वारा की गई तैयारी आपको उतनी देर जीवित रखेगी |
९.       पहला हमला वही करते है और यदि आप प्रतिकार को संगठित होंगे तो उनको सुरक्षित कर दिया जाएगा | अतः आपको बस पहले हमल से बचने के बारे में सोचना होगा | क्यों के बिना कारण तो आप संगठित होने से रहे |
१०.    क्षेत्र राज्य स्तर पर आपको एक ऐसा नेतृत्व चाहिए जो स्पष्टतः आपकी समस्या समझ सके | लोकतंत्र में ऐसा नेतृत्व नहीं मिलेगा |  आपके क्षेत्र के सज्जन पुरुषों को ऐसा व्यक्तित्व खोजना होगा | और ऐसे व्यक्ति की जीविका का दायित्व समाज का होगा |
११.    हर वो व्यक्ति जो कुछ नहीं कर सकता आपातकाल में जेहर की शीशी रखे | वे बहन-बेटिया जिनकी सुरक्षा उनके सम्बन्धी नहीं कर सकते उनके लिए बेइज्जती के जीवन से सम्मान की मृत्यु उत्तम है | यद्दपि ये निर्णय उनके स्वं का होना चाहिए इतिहास में महरानी पद्मावती जैसा उत्तम उदाहरण है जिन्होंने अपने शरीर को किसी कुत्ते के स्पर्श में नहीं आने दिया |
१२.    आपके पास अब ज्यादा अस्त्र बचे नहीं है अपनी सरकार के अभाव में जिहादियो का आर्थिक बहिष्कार वो भी तब तक जब तक वे जिहादी ये नहीं कहते के हम आपकी गाडी में हवा नही भरेंगे आपको सामान नहीं बेचेंगे तुम तो काफिर हों हमारे अपने लोगो से ही हमारी दूकान चल जाती है | क्यों के आपके पास से एक वर्ग खत्म हों रहा और वो सरकारी कार्यालयों में पानी पिलाने की नौकरी के लिए मर जा रहा है |

ऐसी व्यवस्था में आप ज्यादा कुछ नहीं कर सकते जहा राज सत्ता को बनाने वाला वो वर्ग हों जो आपको घृणा से देखता हों | बिलकुल सभी ऐसे नहीं होते १ बच्चे पैदा कर के जिहाद में आस्था ना रखने वाले वन्देमातरम गाने वाले उनमे से कुछ तो वापस आने की चाह रखने वाले मुस्लमान भी है | उनसे मेल-जोल, प्रेम व्यहवार बनाये रखे क्यों के उन जैसो की संख्या ही कितनी है और यदि वे वापस आना चाहे अपने पूर्वजो के वैदिक मार्ग पर तो उन्हें सहर्ष स्वीकार करे | उनसे रोटी-बेटी के सम्बन्ध वैसे ही रखे जैसे अपनी बिरादरी मे रखते है |
ज्यादा लिखने की इच्छा नहीं पर एक कवि की ये २ लाइन जरुर रखूँगा
उसके कत्ल पर मै चुप था, अगला नम्बर मेरा आया
मेरे क़त्ल पर आप चुप हों, अगला नम्बर आपका है 

Tuesday, August 6, 2013

Vivekanand’s ardent desire for Beef

We are presenting the proofs compiled by Swami Vidyanand Saraswati to expose the most famous fraud sanyasi promoted by Britishers in British India of Beef Eating. The quotes are taken from Swami Vidyananda Saraswati’s book – “The Gospel of Swami Vivekananda”. That book is a compilation of proofs that exposes the hypocrisy & duality of Vivekanand.
Ardent desire for beef
We give below some of the arguments advanced by the Ramakrishna Mission in the Calcutta High Court to prove that the Mission and its founder, Shri Ramakrishna Paramhansa, had nothing to do with Hinduism and, therefore, they should not be treated as Hinduism –
“During his practice of Islam, Ramakrishna repeated the Mantra ‘Allah’ and said ‘Namaz’ thrice daily. During this while he also dressed and ate like a Muslim. Another biographical work ‘Ramakrishna Panth’ by Ashoy Sen provides some more news. A Muslim cook was brought who stood outside the kitchen and instructed a Brahmin cook inside made to wear a lungi, how to cook in a Muslim way. We are also told that at this time Ramakrishna felt a great urge to take beef. However, this urge could not be satisfied openly. But one day as he sat on the bank of the Ganges, a carcase of a cow was floating by. He entered the body of a dog astrally and tasted the flesh of the cow. His Muslim ‘Sadhana’ was now complete (because no Hindu, however fallen he may be, would like to eating the flesh of a cow, and that too of a dead animal which none but an ‘aghori’ ¼v?kksjh½ would do and that again by entering the dead body of a dog). All this is highly comic but it holds an important position in the Mission lore. The lawyers of the Mission did not forget to argue in the court that Ramakrishna was on the verge of eating beef. This was meant to prove that he was an indifferent Hindu and not far from being a devout Muslim?” (Times of India, Ahmedabad, Dated January, 23 1986)

Thus spoke Swami Vivekananda

To the accusation from some orthodox Hindus that the Swami was eating forbidden food (beef), he retorted – “If the people of India want me to keep strictly to my Hindu diet, please tell them to send me a cook and money enough to keep him.” (Bio, 129)

That Vivekananda had no love for his motherland, is crystal clear from his following words –
“I belong to the world as much as to India. No humbug about that. What special claim can India have on me? Am I a nation’s slave? I see a greater power than man or God or Devil at my back (that greater power has not been indicated). I require nobody’s help.” (Ibid)

“Swami Vivekananda advocated animal food for the Hindus if they were to cope at all with the rest of the world in the present reign of power and find a place among the other great nations.” (Bio., P. 96)

“I say eat large quantities of fish and meat.” (Complete Works of Swami Vivekananda, V. 402)

“Is God a nervous fool like you that the flow of the river of his mercy would dry up by a piece of meat? If such be he, his value is not a pie.” (IV, 359)

“We must use the food which brings the purest of mind.” (I, 136)

“There are certain kinds of food that produce a certain change in the body and in the long run have a tremendous effect on the mind. There are certain foods which are exciting. If you eat such food, you will find that you cannot control the mind.” (IV, 4)

“To eat meat is surely barbarous and vegetable food is certainly purer – who can deny? For him surely is a vegetarian diet whose one end is to lead spiritual life. But he who has to steer the boat of his life with strenuous labour, must of necessity take meat.” (V, 485)

But Vivekananda should know that vegetarians have more energy and stamina. The use of the word horse-power against tiger-power makes it clear. Vivekananda wanted lo lead spiritual life. Why was he then a non-vegetarian? In fact it was his weakness which he did not defend. He said – “I am myself not a vegetarian, but I admit that vegetarian food is ideal for man. When I eat meat, I know that I am not doing the right thing. But I won’t defend my weakness at the cost of an ideal. The ideal thing is that we should avoid taking meat. After all, even animals are our own self.” (Vedanta in practical life, P. 12)